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इंडियन ऑफिस गर्ल सेक्स कहानियाँ हिंदी में.

इंडियन ऑफिस गर्ल सेक्स कहानियाँ हिंदी में. कीर्ति ने पढ़ाई में इंजीनियर की पढ़ाई की हुई थी जब की 8 साल की थी तभी उसके पिता का सैया उसके सर से है गया था कीर्ति की मैन दिन रात एक करके अपनी बेटी की पढ़ाई पुरी करवाई और कीर्ति भी अपनी मां के सपनों पर खड़ी उतरी और उसकी नौकरी ग गई आज उसका ऑफिस में पहले दिन था कीर्ति अपनी मां से का रही थी की मां मुझे जल्दी से नाश्ता दे दीजिए आज मेरा ऑफिस में पहले दिन है मैं पहले ही दिन लेट नहीं पहुंचाना चाहती आप ऐसा करो आप एक रोल बनाकर दे दो रोटी और सब्जी का मैं गाड़ी में का लूंगी उसने कहा कीर्ति खुद को आईने में देख कर तैयार हुई सब कुछ परफेक्ट चाहती थी वह अच्छी शर्ट पेंट गले में एक स्कार्फ हाथ में बड़े डायल की घड़ी वगैरा वगैरा तैयार होकर कीर्ति मां के पास पहुंची बेटी को देखकर मां की आंखों से आंसू बहाने लगे कितने सालों बाद यह दिन आया है अपनी बेटी को इस लायक बनाया की आज बेटी एक बड़ी कंपनी में प्रोजेक्ट हेड बन गई थी अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद इतनी बड़ी कंपनी से बुलावा वह दिन कीर्ति की मां के लिए बहुत बड़ा दिन था लगा जैसे उनके कासन के दिन खत्म होने वाले हैं नाश्ता हाथ में लेकर मां का पर छूकर निकाल पड़े कीर्ति उसके ऑफिस पहुंचने ही सभी से परिचय कराया उसके बस किशोर कुमार ने इतना बड़ा ऑफिस और इतने लोग उसकी आंखें जगमगा उठी उसने जाते ही काम शुरू कर दिया ऑफिस में सभी बहुत अच्छे लगे और खासकर उसके बस किशोर कुमार वह हर बात और हर काम को अच्छे से समझते थे कभी नाराज नहीं होते थे अभी एक ही महीना बेटा था की एक दिन किशोर कुमार ने कीर्ति को अपने कैबिनेट ने बुलाया कुछ काम के सिलसिले से और काम की बात करते-करते वह कब कीर्ति के पीछे आकर खड़ा हो गया पता ही नजर अपने बस को अपने पास देख कर खेती खड़ी होने लगी तो किशोर ने उसके कंधों को पढ़ते हुए बोला बैठो बैठो कीर्ति उसकी वह शिवन अजीब सी थी और उतनी ही अजीब थी उसकी नजर कीर्ति अंदर तक सी है वो ऐसे स्पर्श को पहचानती थी क्योंकि एन जान कितनी बार अलग-अलग हाथों ने उसे यहां वहां छुआ था कभी बस में कभी सड़क पर कभी कॉलेज में तो कभी बाजार में वो तब भी चुप थी और आज भी चुप ही रही फिर वह अचानक से उठी और केबिन के बाहर चले गई अब तो हर दिन किशोर कुमार कीर्ति को काम के बहन रोजाना अपने केबिन में बुलाकर यहां वहां चुने लगा और हाथ तो तब होती जब कीर्ति को चुने के बाद उसे ऐसी नजर से देखा था जैसे की मानो विश्वविद्यालय [संगीत] [संगीत] मां ने उसके सर में तेल डाला और नरम उंगलियां से उसके सर की मालिश करने लगी और यूं ही पूछ बैठी कीर्ति बेटा कोई बात है क्या आजकल ऑफिस से आने के बाद तुम मुरझाई मुरझाई सी रहती है काम का प्रेशर है क्या या कोई और बात हो तो बताना बेटा कीर्ति की मंडी हुई आंखों से आंसू के बोल लड़ पड़े मां की यह बात सुनकर वह मुड़कर मां के गॉड में सर रखकर सिसकने लगे उसका करूं रुदन सुनकर मां घबरा गई मां बोली बोल मेरे बच्चे क्या हुआ मैंने तुझे इतना कमजोर बनाया है की तू किसी परेशानी से डर कर रन लगे तू तो मेरा बहादुर बच्चा है ना तुझे मैंने अकेले अपने दम पर पाल है तो घबरा मत मैं तुझे आज तेरी परेशानी नहीं सुनेगी चाहे वो परेशानी कितनी भी बड़ी क्यों ना हो अगर तू मेरी बेटी है तो कल अपनी परेशानी के करण का अंत करके आएगी बस मैं यह जानती हूं की मेरी बेटी कमजोर नहीं हो शक्ति मां की यह बातें सुनते ही कीर्ति को जैसे उसकी शक्ति मिल गई हो सच ही तो कहा था की अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी नौकरी जान का डर नहीं था उसे बल्कि अब अपने सम्मान से बढ़कर उसे कुछ नहीं चाहिए था अपने अस्तित्व की रक्षा उसे अब खुद ही करनी होगी अगले दिन कीर्ति ऑफिस पहुंची और सर काम सुकून से निपटाया आज उसके चल में ही आत्मविश्वास था सभी को ऑफिस में हुआ कुछ बदली बदली से ग रही थी नेहा ने पूछ ही लिया क्या बात है कीर्ति आज तो गजब के खिले-खिली ग रही हो कहानी किसी से प्यार तो नहीं हो गया हां यार प्यार तो हुआ है अपने आप में विश्वास से अपने सम्मान से और अपनी हिम्मत से कलम ने एक पाठ पटाया उसके बाद जीवन के प्रति खुद के प्रति और लोगों के प्रति मेरे देखने का नजरिया ही बादल गया मुस्कुराते हुए कीर्ति बोलती चली गई और नेहा सुनती चली गई तभी दफ्तर का चाप आकर बोलना है साहब आपको बुला रहे हैं कीर्ति अपने केबिन से निकालकर बस के केबिन की तरफ बधाई आज उसे कोई डर नहीं था आज उसे छुअन का कोई भाई नहीं था जिससे उसका रोम रोम शहर उठाता था कीर्ति कवि में पहुंचकर सामने बैठे बस की आंखों में आंखें डालकर बात करने लगी अब उसकी पलके तक नहीं झुकी थी फाइल देने के बहाने किशोर कुमार ने उसका हाथ छुआ तो शेरनी जैसी उठ गई और बोली सर शायद आपके हाथ इधर-उधर फिसल रहे हैं इसे संभालिए शुरू शुरू में मैं आपके इरादे समझ नहीं पी और अब समझ रहे हो मैं चुप बैठने वालों में से नहीं हूं आपकी बीबी और पुलिस दोनों तक यह खबर पहुंचाऊंगी और अभी के अभी बाहर सभी को बताऊंगी आपके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं इसलिए चुप हो वरना कीर्ति का किशोर कुमार घबरा गया और पसीना पहुंचता हुआ सॉरी बोलकर ऑफिस से निकाल गया कीर्ति मुस्कुराते हुए केबिन से बाहर आई और आज उसने अपने अंदर खुद के छुपी ताकत को पहचाना आज पहले बार उसने किसी को ना कहा पहले बार उसने अपने चुप्पी तोड़ी और आज पहले ही बार कहा था अब बस घर पहुंची तो ऐसे जैसे सारे जहां के फूल उसके गालों पर किल गए थे मां ने बेटी के सामने खीर रखें जो वह जब खुश होती थी तब बनती थी और भगवान को भोग लगाते थे लेकिन मुझे पता है की तूने अपने परेशानी का सामना कर लिया होगा और जीती भी होगी बताना चाहे तो बताना नहीं तो कोई बात नहीं कीर्ति ने मां को साड़ी बात बता दी और मां के गले ग गई मां आपने मुझे एक और जीवन दिया है आज मैंने अपने अंदर की शक्ति को पहचाना है जाना है की किस कब कहा क्या कहना है बस अब बहुत हुआ तो दोस्तों यदि हमारी आज की कहानी आपको कैसी लगी और आपका क्या विचार है हमें कमेंट में जरूर बताएं वीडियो को लाइक करना बिल्कुल ना भोले और ऐसी ही मनोरंजन कहानियां के लिए चैनल को सब्सक्राइब कर लेने और पास में दी गई बेल आईकॉन को प्रेस करके उसको जो पर सेट कर ताकि मेरी आने वाली सभी मनोरंजन कहानियां के नोटिफिकेशन सबसे पहले आप तक पहुंच सके मिलता हूं फिर अगली कहानी के साथ तब तक के लिए धन्यवाद

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Indian Office girl Sex stories in hindi

Title: Indian Office girl Sex stories in hindi

Views:   2 views

Added on: January 9th, 2024

 sex stories in hindi

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