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बस में आग छुओ


बस में आग छुओ. स्पर्श एक ऐसा तोहफा है जिसे हमने भगवान ने दिया है। चीज़ का स्पर्श और स्त्री पुरुष के स्पर्श में ज़मीन आसमान का फर्क है। भारत में ऐसे बहुत सारे मंदिर हैं जिनके बारे में स्कूल या कॉलेज की किताबों में कोई भी लेख नहीं है।
कामाख्या देवी मंदिर जिसे अंग्रेजी में "माहवारी देवी" मंदिर के नाम से भी पहचाना जाता है। कहा जाता है कि महिलाएं इस मंदिर में दर्शन के लिए ज्यादा आती हैं। कुंवारी और शादीशुदा महिला अपनी मासिक पीड़ा और यूं समस्या का समाधान देवी के दर्शन से मिलती है।
गुवाहाटी एक छोटे से गांव में घूमने गया था। मंदिर का वातावरण बहुत सुंदर था। देवी की मूर्ति से साफ दिखाई देता था। देवी की योनि से खून की धारा के रूप में कुमकुम और पानी मिक्स होकर बह रहा था। मैंने वहा एक महिला को निराश जनक स्थिति में देखा।
मैं उसके पास बैठ गया और पूछने की हिम्मत जताई। “आपके जीवन में कोई दुविधा है क्या।” महिला के गले में मंगलसूत्र पहनना था। मैंने उससे पानी के लिए पूछा.वो चुप थी. फिर मैंने वहां से उठाया और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
महिला ने अपना नाम गहना तोमर (गोपनीयता के लिए बदला हुआ नाम) बताया। मैंने उसकी तारीफ कह कर कहा, "आप भी अपने गहनों की तरह खूबसूरत हो।" गहना की त्वचा का रंग भूरा सांवला, उमर 28 थी। जिस्म के बारे में बताऊ तो 38डी-26-34।
गहना ने मुझे कहा कि उसकी पढ़ाई 12वीं पास है। उसने बताया पढ़ाई के लिए उसे माता पिता ने कोलकाता भेजा था। अचानक उसके पिता जी की मौत की खबर सुनते ही वह असम वापस आ गई। गहना ने बताया उसकी कोर्ट मैरिज थी। सास और ससुर उससे बुरा व्यवहार करते हैं। Dahej ke liye pereshan karte hai.

गहना ने मुझसे पूछा, "आप ही बताएं मेरी बुजुर्ग मां के सारे गहनें देने के बाद में काहा से दहेज लौ?" गहना ने कहा उसकी सास ने जिद लगा रखी है कि, "उसका बेटा अलग कमरे में सोएगा और मैं अलग कमरे में सोऊंगी जब तक लोगों को दहेज नहीं देती।"
मुझे भी बहुत दुःख हो रहा था जब वो अपनी दर्द भरी कहानी सुना रही थी। उसने कहा कि उसका पति रोज़ उसके पेट में लाठो से मरता है। उसके गुप्त अंगो को माचिस की चिंगारी से छूटा है मेरे जोड़े लम्बे ज़मीन खिसक गई ये सब सुनकर।
गहना के आंखें आंसू बहाकर लाल हो गई थीं। गहना ने बताया शरीरिक और मानसिक पीड़ा से परेशान होकर इस मंदिर में आयुर्वेदिक जड़ी बूटी और देवी के दर्शन लेने आती है। "पर देवी मां मेरा दर्द कहां समझती है।" हौसला देते हुए मैंने उसे कहा, "देवी मां तुम्हारी पुकार जरूर सुनेगी।"
कुछ दिनों बाद गहना की मां का देहांत होता है। उसके ससुराल वाले उसे कहते हैं अपना मनहूस शकल कभी मत दिखाना मैं अपने पैसे खर्च करके उसकी मां का अंतिम कार्यक्रम रिवाज पूरा करता हूं। गहना बिलकुल अकेली पड़ जाती है। मैं उसे शहर में अच्छी नौकरी देने का वादा करता हूं।
दूसरे दिन हम बस का इंतज़ार कर रहे हैं। आरक्षण की वजह से सारी सीट फुल होती है। 2 घंटे तक कोलकाता जाने वाली बस का इंतज़ार कर रहे हैं। भीड की वजह से हम बस में नहीं चढ़ते गहना फुल हैंड ब्लाउज पहनती है ताकि उसकी पीठ पर जले हुए निशान पर किसी मर्द की नजर ना पड़े।
आख़िरकार एक आखिरी बस में हम दोनों चढ़ते हैं। भीड होने की वजह से हम पीछे साइड जाते हैं। रास्ता ख़राब होने की वजह से बस कूदती है। गहना को मैं सुरक्षित जगह खड़े करता हूं ताकि उसे धक्के ना लगे। गहना ने बताया वो पढ़ाई में कामजोर थी।
बचपन में उसकी आवाज चली गई थी। उसे स्कूल के अंदर नहीं ले रहे थे। 4 साल के बाद उसकी आवाज वापस आई। स्कूल के 4 साल ऐसे ही बरबाद हो गए। मैंने कहा कोई बात नहीं. घर बैठे लैपटॉप पर काम करना है। आपको सिखा दूंगा. गहना मुस्कुरायी।

अचानक दर्द का धक्का लगा और चाटी का स्पर्श से उसके स्तन दब गये। ऐसा 6-7 बार हुआ. मैंने गहना से माफ़ी मांगी. गहना कुछ नहीं बोली. शायद उसे नींद आ रही थी. गहना रोने लग गई. मैंने पूछा, "क्या हुआ, गहना?" गहना ने कहा पेट में ज़ोर से दर्द हो रहा था। वो नहीं कह सकती
मैंने कहा, "कोई बात नहीं। नीचे उतर जाते हैं।" गहना ने कहा, "रहने दो, कर लुंगी बर्बाद। टिकट के पैसे बर्बाद हो जाएंगे।" मैंने गहना को समझा, "आपके दर्द के सामने पैसे कुछ नहीं।" और मैं गहना को लेकर बस से उतर जाता हूं।
सड़क के कोने में गहना उल्टी करने लगती है। मैं गहना की पीठ सहलाता हूं। गहना सारा पानी पी जाती है। मैं और गहना जंगल की ओर बढ़ते हैं। तालाब नज़र आते ही हम पानी की बोतल भर लेते हैं। सूरज ढलने लगता है. गहना की आँखों में डर बिल्कुल नहीं नज़र आता है।
फिर मैं गहना को जंगल से जंगली फल तोड़ कर ले आता हूं। हम दोनों अंगूर खाते हैं। फिर मैं गहना को अलग कपड़े पहनने की सलाह देता हूं। मैं तालाब की तरफ जाने लगता हूं पर गहना मुझे रुकने को कहती है। मैंने पीछे मूड के देखा तो गहना ने अपने स्तनों को ब्लाउज से ढक लिया था।
उसकी नंगी पीठ नंगी थी. मुझे थोड़ी उत्तेजना हुई. पर मैंने खुद पर कंट्रोल रखा। गहना ने मुझसे रिक्वेस्ट कीया उसको ज़ख्म पर जदी बूटी का लेप लगाने के लिए। मैं गहना के करीब गया और उसके जख्मो पर लेप लगाने लगा।
मैंने गहना से पूछा, "आपने 8 साल तक इतना ज़ुल्म क्यों सहा?" गहना ने इमोशनल होते हुए कहा, "मुझे धमकी देते थे अगर मैंने पुलिस में शिकायत की तो मुझे जान से मार देंगे। मुझे घर से बाहर सिर्फ मंदिर जाने देते थे।" धीरे-धीरे गहना सिसकने लगी.

मैंने पूछा, "गहना, क्या हुआ?" गहना ने नाज़ुक आवाज़ में कहा, "आज पहली बार किसी मर्द ने मुझे स्पर्श किया है। 8 साल तक मेरे पति ने मुझे स्पर्श नहीं किया। सिर्फ जुल्म किया मुझपे। 8 साल तक में बंद कमरे में तड़पती रही। कोई मेरी चीख नहीं सुनता था। कभी कभी रात को ठंडे पानी से नहाती थी।”
मैं गहना तो बताता हूं, "लेप लगा के हो गया। आप कपड़े बदल दो।" गहना मुझे रुकने को कहती है। मैं कहता हूं, "पहले आप कपड़े पहनो फिर बात करेंगे। आपके खुले जिस्म को देख मेरा संयम छूट जाएगा और गलती हो जाएगी।"
गहना मुस्कुराती हुई कहती है, “हो जाने दो गलती। मैं पवित्र हो जाऊंगी ज्यादा से ज्यादा।” मैं गहना को समझता हूं कि ये पाप है
गहना गुस्से में कहती है, "कोई भी शादीशुदा महिला अगर स्पर्श और सुख के लिए तड़पती है तो मर्द को समझना चाहिए उसकी पत्नी को क्या चाहिए। मेरा पति तो सिर्फ उसकी मां का गुलाम था। मेरी शादी और मंगलसूत्र का कोई मतलब नहीं।"
गहना अपना मंगलसूत्र उतारकर ज़मीन पर फेंकती है। मैं गहना को पूछता हूं, "आपको क्या चाहिए?" रोते हुए गहना कहती है, "एक पराई स्त्री को अंजान पुरुष जब स्पर्श करता है जिसके लिए वो 8 साल तड़पती है। इतना भी नहीं समझ आते आप।"
मैंने जैसे ही गहना को गले लगाया हूं, वो मुझे टाइट पकड़ती है। इस घने जंगल में हमदोनो को संबंध बनाते हुए देख लेगा तो अनर्थ हो जाएगा। मेरे पास तो "निरोध" भी नहीं है गहना मुस्कुराती हुई कहती है, "जो होगा देखा जाएगा। तुम्हारे स्पर्श से मेरा जिस्म आग से जल रहा है।"
मैं गहना को मेरे ऊपर लेट जाने के लिए कहता हूं। गहना कहती है, "जो आपकी आज्ञा हुजूर," और मेरे ऊपर लेट जाती है। मैं और गहना होठों से चुम्बन लेने लगती है। अचानक गहना की सांसे अटक जाती है।वो अजीब आवाज करने लगती है।

गहना कहती है, "दारो मत मुझे मेरी सांसें आपकी सांसों से मिलती हैं।" हम दोनों में चुम्बन लेते हुए अपने सांसें एक दूसरे के अंदर जाती हैं गहना के सूखे हुए होठों को मैं गीला कर देता हूं। गहना मुझे उसकी गर्दन और कंधे का चुम्बन लेने को कहती है।
मैं शुद्ध जोश से किसिंग करने लगता हूं। साथ में गहना के मम्मों को भी दबाता हूं। गहना का चेहरे ख़ुशी से उभरता है। वो सिस्कारे लेकर अपनी करवटे बदलती है। वो मुझे उसके गले को गिला करने को कहती है और उसके निपल को खींचने को कहती है।
मैं अपनी लार से गहना का गला गीला कर देता हूं। उसके निपल अपने दांतों के बीच धीरे से काट लेता हूं गहना जोर से चिल्लाती है। "मरेगी, मेरी योनि भी गीली हो रही है।" गहना मुझे रुकने को कहती है। मैं पूछता हूं, "क्या हुआ?"
गहना कहती हैं, "मुझे कमर के नीचे से सारे उतारकर जिस्म पर कुछ नहीं रखना था। हम दोनों पूरे नंगे हो जाते हैं।" मैं अपना लिंग उसकी योनि के अंदर घुसाता हूं। गहना भी मेरा पूरा साथ देती है। हम दोनों का जिस्म संबंध का आनंद लेते हैं। कभी मैं उसके ऊपर. कभी वो मेरे ऊपर. गहना मजे से कहती है, "और ज़ोर से।" कब हमें नींद लगती है पता नहीं चलता.

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बस में आग छुओ

Title: बस में आग छुओ

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Added on: January 30th, 2024

 sex stories in hindi

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